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सूना रास्ता

आर्य दिन भर पर्वतों के विशाल बाहों में अपना समय बिताकर अब अनमने ढंग से घर की तरफ लौट रहा था. वापसी के मार्ग में एक लम्बा रास्ता सूना रहता है और उस ओर जाने वाले अक्सर दिन ढलने के पहले ही उसे पार कर लेना पसंद करते हैं क्योंकि सभी ने उस राह के बारे में कुछ अजीब सा सुन रखा था. उसी राह से आर्य को भी जाना था लेकिन वह तो अभी भी पहाड़ों के खूबसूरत दृश्यों में खोया हुआ था और इस बात से अनजान भी कि अब वो उसी रास्ते को पार कर रहा है जिससे दिन ढलने के बाद लोग निकलने से डरते हैं.

सहसा किसी आवाज़ ने उसका ध्यान खींच लिया और उसे अहसास हुआ कि वह उस चर्चित रास्ते पर चला जा रहा है वो भी सूरज डूबने के समय. अँधेरा होने में बस कुछ ही क्षण बाकी थे लेकिन किसी भी सूरत में वह अँधेरे से पहले उसे पार नहीं कर सकता था. उसके मन में डर ने अपनी जगह बनाना सुरु कर दिया था वह तेज क़दमों से आगे बढ़ने की कोशिश करने लगा. पर कहते हैं ना कि डर लगने पर अपने ही पैर अपना साथ नहीं देते. वह छह कर भी तेज नहीं चल पा रहा था.

अचानक उसे लगा कि कोई उसे दूर से देख रहा है. उसने हिम्मत की लेकिन उसकी नजर उस अनजाने साए की ओर जाने को तैयार नहीं थी. अचानक उसने किसी को मदद के लिए पुकारते सुना. एक पल के लिए वह अपना डर भूल गया और आवाज़ की दिशा में दौड़ पड़ा. वहाँ उसने देखा कि एक वृद्ध जख्मी हालत में कराह रहा है और आर्य को देखकर अपने हाथ मदद की आस में आगे बढ़ा रहा है.

आर्य तुरंत उसके पास गया और अपने बैग से पानी की बोतल निकालकर वृद्ध को पानी पिलाया. अपने रोमांचक जगहों पर जाने के शौक के कारण आपातकाल के लिए वह हमेशा अपने साथ प्राथमिक उपचार का किट हमेशा रखा करता था. उसने बूढ़े के जख्मों को साफ़ करके उसपर पट्टी बाँध दी. उसने बूढ़े से जानना चाहा कि उनकी यह हालत कैसे हुयी. जवाब में बूढ़ा मुस्कुराया और बस इतना ही कहा – बस यह जानने के लिए कि क्या ऐसे भयानक सूने रास्ते में भी लोग डर कर अपनी जान बचाने के बदले किसी की मदद करने में यकीन रखते हैं?

आर्य कुछ समझा नहीं. बूढ़े ने बताया कि कई साल पहले एक तेज रफ़्तार गाड़ी की टक्कर से वह घायल हो गया था लेकिन किसी ने भी उसकी मदद नहीं की. आर्य ने हँसते हुए कहा कि बाबा, मजाक मत कीजिये. कई साल पहले से आप कैसे यहाँ इस हालत में रह सकते हैं. सच-सच बताइए. और वैसे भी इस रास्ते के बारे में लोग बहुत अजीब बाते करते हैं. फिर आप अँधेरे में इस डरावनी जगह पर आये क्यों?

बूढ़े से हंसकर कहा – लोग जिससे डरकर यहाँ अँधेरे में नहीं आते वो डर मैं ही हूँ. यह कहकर वह बूढ़ा गायब हो गया और फिर कभी नजर नहीं आया. शायद उसे बस एक मददगार का इन्तेजार था जिससे मिलकर उसका दर्द कम हो गया कि किसी ने भी उसकी मदद नहीं की थी.

आर्य को कुछ समझ नहीं आया लेकिन वो इतना जरूर जान गया कि आज उसने एक घायल की सहायता की है और शायद इसी लिए वह सुरक्षित उस राह से निकल आया.